रोजगार हांसिल करने में महिलाएं नहीं है पीछे, पुरुषों के बराबर

रोजगार के लिए परिश्रम करने में अब महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। केंद्र सरकार की मनरेगा योजना के आंकडे बताते हैं कि तीन महीनों में रोजगार के जो अवसर सृजित हुए हैं, उनमें करीब 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है। यानी यह तीन महीने भीषण गर्मी में बीते हैं लेकिन मौसम की चुनौतियों के बावजूद महिलाए रोजगार हासिल करने में पीछे नहीं रहीं।

मनरेगा रोजगार परक महत्वाकांक्षी योजना है। जिसके जरिए गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार दिया जाता है। इसमें सौ दिन के रोजगार देने की गारंटी भी है। योजना से जहां श्रमिकों की रोजी रोटी चलती है, वहीं गांव में विकास कार्यो के साथ परिसंपत्तियों का सृजन भी होता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए करीब एक अरब 45 करोड़ के श्रम बजट को मंजूरी दी गई है। साल में कई लाख मानव दिवस सृजित किए जाने हैं। वित्तीय साल के तीन माह बीत गए और करीब 90 दिनो में 7 लाख 53 हजार मानव दिवस सृजित किए जा चुक हैं। इनमें 3 लाख 53 हजार महिलाएं शामिल हैं। जो करीब 50 प्रतिशत है। यानी वित्तीय साल के शुरूआती तीन महीनों में महिलाओं ने रोजगार के लिए श्रम में पुरुषों की बराबरी की है।