ब्रिटेन जर्मनी-अमेरिका सहित 65% लेदर शू आगरा में बन रहे हैं।, CM बोले- जल्द मिलेगा नया प्रोजेक्ट

देश के 65% लेदर शू आगरा में बन रहे हैं। बावजूद इसके आगरा में पिछले 12 साल से जूता मंडी बदहाल है। CM योगी से कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य ने बात की है। बेबीरानी मौर्य ने बताया कि CM योगी ने जल्द आगरा की जूता मंडी के लिए नया प्रोजेक्ट लाने की बात कही है। कैबिनेट मंत्री अब इस सिलसिले में जूता कारोबारियों और आगरा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से बातचीत करेंगी। ब्रिटेन, जर्मनी-अमेरिका सहित 7 देशों में आगरा से लेदर शू एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

7 देशों में 3.5 हजार करोड़ रुपए का होता है कारोबार

आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) के अध्यक्ष पूरन डाबर ने बताया कि आगरा से 25% जूते दूसरे देशों में भेजे जाते हैं। यहां से ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस, हॉलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में जूते का एक्सपोर्ट होता है।

वहीं भारत की बात करें तो 65% लेदर शू सिर्फ आगरा से बने होते हैं। आगरा से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का जूता कारोबार 7 देशों में किया जाता है। जबकि करीब एक हजार करोड़ का एक्सपोर्ट मुंबई और दिल्ली के मर्चेंट एक्सपोर्टर के यहां होता है। इस तरह वर्ष में करीब 4.5 हजार करोड़ के जूते आगरा के विदेशों में निर्यात किए जाते हैं। जनपद के करीब साढ़े चार लाख लोग जूता कारोबार से जुड़े हैं।

आगरा के जूता को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने यहां जूता प्रदर्शनी बनवाई थी। यहां लेदर पार्क बनाया जाना भी प्रस्तावित था। यहां छोटे और बड़े जूता कारोबारियों को एक छत के नीचे व्यापार करने का अवसर दिया जाना था। स्थानीय राजनीति और आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के दांव पेचों के चलते जूता व्यवसाइयों को निराशा हाथ लगी।

जूता प्रदर्शनी पर ADA का कंट्रोल है। व्यापारियों का कहना है कि यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जूता मंडी में दुकान लेने की प्रक्रिया लंबी है। एक दुकान की कीमत लगभग 6 से 40 लाख रुपए तक है। 280 दुकानों में से 10% का ही आवंटन हो सका है, बाकी खाली पड़ी हैं। 21 करोड़ की लागत से 6870 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी जूता मंडी परिसर में एक रेस्टोरेंट, एक बैंक कार्यालय, 22 गोदाम, एक प्रदर्शनी हॉल और सभा स्थल है। इसमें 6 फूड कोर्ट भी हैं।

पूरन डाबर ने बताया कि जूता मंडी अगर आबाद हो जाती है तो यहां छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। विभिन्न राज्यों और शहरों से आने वाले लोग एक ही जगह पूरे शहर के जूतों के सैंपल देख सकेंगे। अधिकांश कारोबारी एक ही जगह उपलब्ध होंगे। घरेलू व्यापार बढ़ने से आगरा के छोटे उद्यमियों के माल की खपत बढ़ जाएगी। जूता मंडी शहर के मध्य में है, इसलिए आवागमन में आसानी रहेगी। माल देखने के लिए आगरा की तंग गलियों में बाहर के व्यापारियों को नहीं भटकना होगा।