केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से रविवार को महज 47 फीसदी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी

केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से रविवार को सत्र 2022-23 में हिंदी शिक्षण प्रवीण, पारंगत और निष्णात (समतुल्य क्रमश: डीएलएड, बीएड और एमएड) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा कराई गई। महज 47 फीसदी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट न भरने पर संस्थान के तीनों पाठ्यक्रमों का सत्र शून्य कर दिया है। मामला, सुप्रीम कोर्ट में हैं।

केंद्रीय हिंदी संस्थान के मीडिया समन्वयक केशरी नंदन ने बताया कि तीनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कुल 689 अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त हुए थे। ओडिशा के अलावा दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों से अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया था। प्रवेश परीक्षा में 326 अभ्यर्थियों ने ही उपस्थिति दर्ज कराई। निष्णात के लिए कुल 30 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, 16 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। पारंगत के लिए संस्थान को सर्वाधिक 551 आवेदन प्राप्त हुए थे, प्रवेश परीक्षा में उपस्थिति 249 अभ्यर्थियों की रही।

 प्रवीण के लिए 108 अभ्यर्थियों के आवेदन मिले थे, परीक्षा में 61 शामिल हुए। प्रवेश परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कराई गई। प्रवेश के लिए हरी झंडी मिलने के बाद भी दो पाठ्यक्रमों में सीटें खाली रहेंगी। पारंगत, प्रवीण व निष्णात तीनों पाठ्यक्रमों में 62-62 सीटें हैं। पारंगत को छोड़कर बाकी में सीट के अनुपात में आवेदन ही कम है।

तो तत्काल प्रवेश कराकर लगाई जाएंगी कक्षाएं 

केंद्रीय हिंदी संस्थान प्रशासन की योजना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पक्ष में आया तो तत्काल चयनित अभ्यर्थियों के प्रवेश लेकर कक्षाएं शुरू करा दी जाएंगी। एनसीटीई की ओर से सत्र शून्य किए जाने पर कुछ संस्थाएं कोर्ट में गई हैं। 24 अगस्त को मामले में निर्णय आना है। संस्थान सत्र शून्य किए जाने से पूर्व अभ्यर्थियों के आवेदन ले चुका था, इसलिए प्रवेश परीक्षा करा ली गई। पहले 29 मई को ही परीक्षा कराई जानी थी, उसे टाल दिया गया था।