आगरा के विश्वविद्यालय में अब छात्रों के एडमिट कार्ड की समस्या, लगभग साढ़े तीन लाख छात्रों की परीक्षाओं पर संकट

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में समस्याओं का अंबार है। एक समस्या खत्म नहीं होती तो दूसरी खड़ी हो जाती है। पहले से ही देरी से चल रहे सत्र की जनवरी अंत में होने वाले परीक्षाओं के लिए विश्वविद्यालय के पास कोई एजेंसी नहीं है। लगभग साढ़े तीन लाख छात्रों की परीक्षाओं पर संकट है।

विश्वविद्यालय में परीक्षा संबंधी कार्य डेविड की एजेंसी डिजिटेक्स टेक्नोलाजिज इंडिया प्राइवेट संभाल रही थी।इस एजेंसी से 2021-2022 सत्र तक का अनुबंध था। डेविड की एजेंसी इस सत्र की ही सभी परीक्षाओं का जिम्मा उठाएगी यानी जब तक पुन: परीक्षाएं नहीं हो जातीं और उनका परिणाम नहीं आ जाता, तब तक का सारा काम डेविड की एजेंसी संभालेगी।सत्र 2022-23 के लिए अजय मिश्रा की एजेंसी एक्सएलआइसीटी से अनुबंध किया गया है।पर प्रो. विनय कुमार पाठक पर लगे आरोपों और मुकदमे के बाद अजय मिश्रा की गिरफ्तारी हो गई। इससे एजेंसी विवादों में है। उसके खिलाफ एसटीएफ की जांच भी चल रही है। विश्वविद्यालय जनवरी अंत या फरवरी की शुरुआत में सेमेस्टर परीक्षाएं घोषित कर चुका है।

विश्वविद्यालय जो भी एजेंसी के साथ अब अनुबंध करेगा, उसके सामने समय की कमी होगी। कम समय में ही साढ़े तीन लाख छात्रों के प्रवेश फार्म भरवाना, फीस जमा कराना, प्रवेश पत्र तैयार करना जैसी चुनौतियां होंगी।एक एजेंसी 2022-23 का काम नहीं करेगी और जिसके साथ अनुबंध है, वो विवादित है। एेसे में विश्वविद्यालय के पास परीक्षाएं कराने के लिए कोई एजेंसी नहीं है। इस बारे में कुलसचिव डा. विनोद कुमार सिंह का कहना कि यूपीडेस्को को लिखित में पत्र भेजा जा चुका है। जल्द ही एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा।

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में नवंबर माह में हुई कार्य परिषद की बैठक के अनुमोदित निर्णय अभी तक जारी नहीं हुए हैं।पुराने निदेशकों ने अब तक अपनी जिम्मेदारियां नहीं संभाली हैं, लेकिन निदेशकों के लिए अध्यादेश में संशोधन के लिए समिति का गठन कर दिया गया है।