लोकायुक्त की टीम ने डेरा डालकर विकास खण्ड मारहरा में मनरेगा घपले की जांच का किया निरीक्षण

मिरहची. विकास खण्ड मारहरा में मनरेगा घपले की प्रक्रिया रूकने का नाम नहीं ले रही है. विकास खण्ड की ग्राम पंचायत धिरामई पांच विसवा के गांव बहादुरपुर में लोकायुक्त की टीम ने डेरा डालकर शिकायत कर्ता की रिूाकायत की जांच की जिसमें घपले उजागर हुआ है. देखना यह है कि लोकायुक्त की टीम इस विकास खण्ड में हो रहे मनरेगा घोटाले में अधिकारियों को क्या कार्रवाई की क्या रिपोर्ट प्रस्तुत करती है.

विकास खण्ड मारहरा की ग्राम पंचायत धिरामई सवा पांच विसवा के गांव बहादुरपुर निवासी निहाल सिंह ने बताया कि उसने ग्राम प्रधान से अपने लिए एक पशु शैड बनबाए जाने का अनुरोध किया था. जिसमें ग्राम प्रधान एवं रोजगार सेवक अतुल यादव ने कहा कि अभी वजट नहीं है. आप किसी तरह किसी से रूपया लेकर पशु शैड बनबा लें बाद में वजट आने पर आपका भुगतान करा दिया जाऐगा. इसी आश्वासन के बाद निहाल सिंह ने अपना पशु शैड उधारी के रूपयों से बनबा लिए बाद में वजट आने पर रोजगार सेवक द्वारा निहाल सिंह को 30 हजार रूपया दिया गया. बाकी धनराशि मांगने पर ग्राम प्रधान एवं रोजगार सेवक द्वारा कहा गया कि इतना ही मिलता है. जब निहाल सिंह ने ऑनलाइन भुगतान धनराशि पोर्टल पर देखी तो वह दंग रह गया क्योंकि इस पशु षैड के लिए एक लाख 20 हजार की धनराशि आहरित की जा चुकी थी.

निहाल ने अपने साथ हुई चीटिंग की जानकारी एवं लिखित शिकायतें डीएम, सीडीओ, डीपीआरओ, डीसी मनरेगा एवं बीडीओ से की तो उसकी शिकायतों को जिला स्तर के अधिकारियों ने गंभीरता से ना लेकर रददी की टोकरी में डाल दीं. थक हारकर निहाल सिंह ने मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त में की जिसको लोकायुक्त ने गंभीरता से लेकर तीन सदस्यों की कमेटी गठित कराकर ग्राम पंचायत धिरामई पांच विसबा में गांव बहादुरपुर भेजा जिसमें गंभीर अनियमिताऐं मिलीं.