आईआईटी कानपुर इंस्टिट्यूट की लैब ने पानी को शुद्ध करने के लिए एक बोतल बनाई

कानपुर. प्रदूषित पानी पीने से होने वाली समस्याओं से जूझ रही दुनिया के लिए आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) का नया आविष्कार सब कुछ बदल सकता है. इंस्टिट्यूट की लैब में पानी को शुद्ध करने के लिए एक बोतल बनाई गई है. इसमें कुछ ऐसे पदार्थ फिट किए जाएंगे, जो पानी में मौजूद भारी धातुओं (हेवी मेटल्स) को सोख लेगा. पानी भरने के बाद बोतल को सिर्फ दो मिनट के लिए हिलाना होगा. बोतल में अंदर लगे मटीरियल से पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी का पता भी लगाया जा सकेगा. एक लीटर पानी साफ करने का खर्च सिर्फ ₹2 आने का अनुमान है.

खराब पानी आम समस्या : भारत में खराब पानी आम समस्या है. पहले नदियों के किनारे का पानी साफ माना जाता था, लेकिन गंगा किनारे के गांवों के पानी में भी अब लेड और आर्सेनिक जैसे भारी धातुओं की मौजूदगी मिलती है. ऐसा अशुद्ध पानी दीर्घकाल में लोगों को कैंसर के अलावा कई अन्य घातक बीमारियां देता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि दुनिया में करीब 85 करोड़ लोगों के पास साफ पेयजल की व्यवस्था नहीं है.

ऐसे करेगा काम : अर्थ साइंसेज विभाग के प्रफेसर इंद्र शेखर सेन और एमआईटी टाटा सेंटर के साथियों ने मिलकर कम खर्च और पानी बर्बाद न होने वाले तरीके से पानी को साफ करने का काम शुरू किया. प्रफेसर इंद्रसेन ने बताया कि पानी की बोतल में सॉर्बेंट (गाढ़ा द्रव्य) फिट किया गया है. किसी भी पानी को बोतल में भरने के बाद बोतल को दो मिनट के लिए हिलाना होगा. पानी में मौजूद भारी धातु जैसे लेड, क्रोमियम और कैडमियम को द्रव्य सोख लेगा. पानी पीने के लायक बन जाएगा. द्रव्य को लैब में निकालकर पानी में धातुओं की मौजूदगी भी चेक की जा सकेगी. इससे सरकार को नीति बनाने में मदद मिलेगी.

बोतल का प्रोटोटाइप विकसित कर लिया गया है। कानपुर के जाजमऊ में इसके फील्ड ट्रायल होंगे। इसके बाद इस तकनीक को बाजार में उतार दिया जाएगा। अभी अनुमान लगाया जा रहा है कि एक लीटर पानी को साफ करने की कीमत 2 आएगी। पेयजल के अतिरिक्त फूड और बेवरेज इंडस्ट्री में इस आसान तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सिंचाई के पानी की निगरानी, डेयरी उत्पादों और सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि में भी इस बोतल का इस्तेमाल किया जा कसेगा। बाजार में उपलब्ध आरओ के मुकाबले इस बोतल में एक भी बूंद पानी बर्बाद नहीं होगा.