ईडी ने बुधवार को अर्पिता मुखर्जी और पार्थ चटर्जी के पूरे बंगले पर छापा मारा, जमीन खोदकर ली तलाशी

बंगाल शिक्षक घोटाला मामले में ईडी ने बुधवार को बीरभूम जिले के शांति निकेतन स्थित पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के बहुचर्चित ‘अपा’ नामक बंगले की जमीन खोदकर तलाशी ली। ईडी अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ यहां पहुंचे और पूरे बंगले की जांच की। जमीन गीली होने पर संदेह हुआ तो बगीचे की मिट्टी खोद कर तलाशी ली गई। बीरभूम के अलावा भी ईडी की टीम ने कुछ अन्य जिलों में तलाशी अभियान चलाया।

दूसरी ओर पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी व अर्पिता मुखर्जी को बुधवार को कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के दौरान वहां मौजूद लोगों ने चोर चोर के नारे भी लगाए। चूंकि मंगलवार को ईएसआई जोका अस्पताल ले जाते वक्त एक महिला ने पार्थ पर चप्पल फेंकी थी, बुधवार को कोर्ट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

अर्पिता मुखर्जी को लेकर हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में अर्पिता की कई फर्जी कंपनियों के दस्तावेज ईडी के हाथ लगे हैं। इनमें से एक फर्जी कंपनी के ठिकाने पर मैरिज हाल और अपार्टमेंट मिला है। इसके साथ ही एक कंपनी का डायरेक्टर चपरासी है।

पत्थर कारोबारी के ठिकानों पर छापेमारी

ईडी ने बुधवार को बीरभूम जिले में पत्थर कारोबारी तुलु मंडल और करीम खान के ठिकानों पर भी छापा मारा। एक तरफ जहां तुलु मंडल को बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुव्रत मंडल का करीबी माना जाता है, वहीं करीम खान एक स्थानीय तृणमूल नेता है। बताया जाता है कि अनुव्रत पूर्व मंत्री पार्थ के करीबी रहे हैं। ऐसे में अनुव्रत के करीबी ईडी के निशाने पर हैं।

ईडी के अधिकार के खिलाफ 17 विपक्षी दल हुए लामबंद

सुप्रीम कोर्ट के मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) संशोधन को सही ठहराने वाले आदेश के खिलाफ 17 विपक्षी राजनीतिक दल लामबंद हो गए हैं। इन दलों का तर्क है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी एजेंसियों को ज्यादा अधिकार दिए जाने से दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने इसे खतरनाक करार दिया है। विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान जारी कर अपनी मंशा जताई और फैसले की समीक्षा के लिए कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में पीएमएलए में किए गए संशोधनों को बरकरार रखा है। इससे ईडी जैसी एजेंसियों को ज्यादा अधिकार मिले हैं।

ये दल हैं शामिल

विपक्षी दलों में कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी साथ आए हैं, जबकि अन्य दलों में डीएमके, सीपीआईएम, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आईयूएमएल, सीपीआई, आरएसपी, शिवसेना के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। अपने बयान में कहा, हमें उम्मीद है कि यह खतरनाक फैसला अल्पकालिक रहेगा और संवैधानिक प्रावधान जल्द ही लागू होंगे।

विपक्षी दलों ने जताई गहरी चिंता

विपक्षी दलों ने बयान में कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश से होने वाले दूरगामी असर को लेकर गहरी चिंता प्रकट करते हैं। शीर्ष अदालत ने धनशोधन निवारण कानून-2002 में संशोधन की छानबीन नहीं की, जिसमें कुछ संशोधन वित्त विधेयक के जरिये किए गए। बयान में कहा, अगर भविष्य में सुप्रीम कोर्ट वित्त विधेयक के जरिये हुए संशोधनों को कानून के लिहाज से गलत ठहरा दे तो पूरी कवायद बेकार हो जाएगी।