आगरा में घड़ियाल बच्चों के लिए चंबल बाढ़ का पानी बना मुसीबत, 5500 घड़ियाल के बच्चे तेज बहाव में बह गए

चंबल में तासौड़ से लेकर इटावा के भरेह और पचनदा तक इस साल घड़ियालों के 6 हजार बच्चों ने जन्म लिया, लेकिन 1982 और 1996 का रिकॉर्ड तोड़ चुकी चंबल नदी की बाढ़ के तेज बहाव में इनमें से 5500 से ज्यादा बच्चे बह गए हैं। 95 फीसदी से ज्यादा घड़ियालों के बच्चे बह कर पचनदा और उससे आगे तक पहुंच गए हैं, जबकि बड़े घड़ियाल और मगरमच्छ इस बाढ़ में भी अपना अस्तित्व बचाए हुए हैं। चंबल में 850 से ज्यादा मगरमच्छ बीहड़ के गांव और नदी के पास के तालाबों में घुस गए हैं।

वन्य जीव विशेषज्ञ और नेशनल चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव के मुताबिक रेडियो टेलीमेटरी के जरिये किए गए अध्ययन में सामने आया है कि बाढ़ में जो बड़े घड़ियाल बहकर पचनदा या भरेह तक चले गए हैं, वह अक्तूबर में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अपने मूल स्थान पर लौट आएंगे। अमेरिकी विशेषज्ञ विलियम जैफरी लेंग और एमसीबीटी के जेलाब्दीन महमूद हर साल 20 घड़ियालों पर रेडियो टेलीमेटरी ट्रांसमीटर लगाकर अध्ययन कर रहे हैं।
यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत घड़ियालों पर चल रहे अध्ययन में सामने आया है कि घड़ियाल 16 किमी के अपने क्षेत्र में तैरते हैं, लेकिन बाढ़ में यह 200 किमी की दूरी भी पूरी करते हैं। बाढ़ में यमुना के संगम वाले भरेह में मछलियों की भारी मौजूदगी के कारण घड़ियाल वहीं रहते हैं और पूरे साल का 80 फीसदी खाना बाढ़ के दिनों में खा लेते हैं। ये सिंध, क्वारी नदी में भी बाढ़ के कारण पहुंच जाएंगे, पर वापस अपनी रिहाइश में आ जाएंगे।
राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि घड़ियालों के बच्चों ने 15 जून के बाद जन्म लिया है। छोटे होने के कारण वह बाढ़ के पानी में बह जाते हैं, केवल बड़े घड़ियाल और मगरमच्छ ही बाढ़ में जीवित रह रहे हैं। रेडियो टेलीमेटरी के अध्ययन से पता चला है कि बाढ़ में घड़ियाल भरेह, पचनदा तक जाकर फिर अक्तूबर में वापस लौट आएंगे।
बाह। चंबल की रिकॉर्ड तोड़ बाढ़ से बाह के 38 गांव तबाह हो गए हैं। गांवों में भरे पानी में मगरमच्छ घूम रहे हैं। पानी में बह रहे सांप-बिच्छू तक घरों तक पहुंच रहे हैं। भटपुरा में करन को बिच्छू ने डंक मार दिया। बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली भी कटी हुई है। रोशनी का कोई इंतजाम नहीं हैं, जिससे रात के अंधेरे में मगरमच्छ के हमले या सांप के डसने का डर लोगों में बना हुआ है।