Agra: रामबरात में 82 साल पहले अंग्रेज कलेक्टर हार्डी पर फेंका गया था बम, हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत

उत्तर भारत का प्रसिद्ध राम बरात पूरे देश में उस समय चर्चा का विषय बना जब 82 साल पहले 27 सितंबर 1940 को आगरा के तीन क्रांतिकारियों ने तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर हार्डी पर बम फेंका था। वह बेलनगंज चौक स्थित बरौलिया भवन में रामबरात देखने आए थे। क्रांतिकारी रोशन लाल गुप्ता करुणेश, वासुदेव गुप्ता और रामप्रसाद भारतीय ने इसे अंजाम दिया। इसमें कलेक्टर हार्डी समेत 32 अन्य लोग घायल हो गए। रामबरात की इस घटना ने आगरा को पूरे देश में प्रसिद्ध कर दिया और यहां तक ​​कि ब्रिटिश शासन भी हिल गया।

हार्डी बम विस्फोट में शामिल क्रांतिकारी रोशनलाल गुप्ता करुणेश के पुत्र आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि ब्रिटिश कलेक्टर हार्डी को रामबरात देखने के लिए बेलनगंज चौक स्थित बरौलिया भवन में बुलाया गया था। भगवान राम का हाथी जैसे ही बेलनगंज चौराहे पर रेलवे पुल को पार किया, बम धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी। भगदड़ मच गई। कलेक्टर हार्डी कुर्सी से गिरे। उसे भी चोटें आई हैं। 32 अन्य घायल भी हुए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके पिता ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ वर्ष 1938 में साप्ताहिक समाचार पत्र आशा की शुरुआत की थी।

हार्डी बम विस्फोट को अंजाम देने के बाद तीनों क्रांतिकारी इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए भाग गए। बाद में अंग्रेजों ने संदेह के आधार पर लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। इस कांड में शामिल वासुदेव गुप्ता अंग्रेजों के हाथ लग गए। उन्हें गंभीर यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने दो साथियों के नामों का खुलासा नहीं किया।

इसके बाद रोशनलाल और रामप्रसाद अंडरग्राउंड हो गए। हालांकि, एक साल बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बमबारी का प्रसारण बर्लिन रेडियो द्वारा किया गया था। इसी के चलते पूरी दुनिया में बम धमाकों की खबर गूंज उठी।

आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि उनके पिता ने क्रांतिकारियों से बम बनाना सीखा था। इस घटना के बाद वह तेज रफ्तार के बम बना रहा था। बम के परीक्षण के दौरान उनकी आंखें प्रभावित हुईं। लेकिन अंडरग्राउंड होने के कारण उनका इलाज नहीं हो सका। ऐसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी।

इसके बाद भी वह अपनी कलम से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाते रहे। इस घटना के बाद रामबरात में पुलिस व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।