लखनऊ-गोरखपुर रूट से होकर गुजरने वाली 84 ट्रेनों को निरस्त किया गया

गोरखपुर. गोरखपुर-लखनऊ रूट से होकर गुजरने वाली हमसफर समेत 84 (42 जोड़ी) ट्रेनें 17 मई से 8 जून तक निरस्त रहेंगी. ट्रेनों के निरस्त होने से पहले से रिजर्वेशन करा चुके यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. हालांकि रेलवे ने उन सभी यात्रियों के टिकट के रुपए वापस करने का एलान किया है. लेकिन पहले से यात्रा करने का प्लान बना चुके यात्रियों को हुई असुविधा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने खेद भी जताया है. गोंडा में 4 साल से रुके हुए गोंडा यार्ड की इंटरलॉकिंग के काम को रेलवे बोर्ड की हरी झंडी मिलने के बाद अब इसे पूरा कराया जाएगा. कार्य के दौरान जिन ट्रेनों का समय निर्धारित है, उन्हें निरस्त किया गया है. इसके अलावा कुछ ट्रेनों को उनके समय पर आवाजाही पर रोक नहीं लगाई गई है. बहुत सी ट्रेनों का रूट डायवर्जन भी किया गया है.

पूर्वोत्तर रेलवे ने गोंडा यार्ड की इंटरलॉकिंग का 4 साल से रुका हुआ काम पूरा करने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के गोंडा जंक्शन से होकर गुजरने वाली 84 ट्रेनों को निरस्त किया है. इससे दिल्ली, मुंबई और बिहार की लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. भीषण गर्मी में ट्रेन निरस्त होने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. रेलवे बोर्ड की हरी झंडी मिलने के बाद गोंडा यार्ड के इंटरलकिंग का काम 17 मई से शुरू होगा. इसके रोड मैप को रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है. 8 जून तक इस कार्य को पूरा करना है.

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जिन यात्रियों ने पहले से ही टिकट बुक कराया है, उनका पूरा किराया वापस किया जाएगा. उन्होंने कहा है कि यात्रियों की असुविधा के लिए उन्हें खेद है. उन्होंने बताया कि 84 ट्रेनों को निरस्त किया गया है. जबकि कुछ ट्रेनों का रूट डायवर्जन भी किया गया है. वहीं कुछ ऐसी भी ट्रेनें हैं, जो अपने निर्धारित समय पर चलेंगी. इससे यात्रियों को जहां 23 दिन तक दिक्कत उठानी पड़ेगी. वहीं रेलवे को नुकसान भी होगा, लेकिन गोंडा में यार्ड की इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा होने के बाद बहराइच और बलरामपुर से आने वाली ट्रेनों को अब गोंडा में बेवजह रुकना नहीं पड़ेगा. वह सीधे आगे की यात्रा के लिए रवाना की जा सकेंगी.

अभी तक इन ट्रेनों को गोंडा में काफी देर तक रोकना पड़ता था. वहीं चार प्लेटफार्म का उपयोग भी नहीं हो पा रहा था. रेलवे अफसरों की मानें तो जल्द ही काम पूरा कराने की तैयारी की जा रही है. गोंडा रेलवे यार्ड की इंटरलॉकिंग के लिए बनाए गए रोड मैप को रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है. ये बहुत बड़ा यार्ड है और यात्रियों की भविष्‍य में सुविधाओं को देखते हुए यार्ड के इंटरलाकिंग का कार्य पूरा करना जरूरी है. जिसके तहत अब 17 मई से आठ जून तक 23 दिन में इंटरलॉकिंग का काम पूरा कराया जाएगा. इस दौरान गोंडा जंक्शन से होकर गुजरने वाली 84 ट्रेनों को निरस्त किया गया है. कई ट्रेनों का रूट डायवर्जन किया गया है. चार साल से लटका गोंडा रेलवे यार्ड की इंटरलॉकिंग का कार्य आरंभ होने से गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जनपद के करीब सवा करोड़ लोगों को सीधे तौर से लाभ मिलेगा.

वहीं यात्री अभिषेक कुमार, डा. सर्वेश कुमार और अभिषेक रेलवे के इस निर्णय से पूरी तरह से असंतुष्‍ट नजर आ रहे हैं. वे कहते हैं कि ट्रेनों के निरस्‍त होने से गर्मी की छुट्टियों और लगने के समय पहले से रिजर्वेशन करा चुके यात्रियों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है. यात्री स्‍टेशन पर इधर-उधर भटक रहे हैं. उन्‍हें ये समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐन गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों को निरस्‍त करने की क्‍या जरूरत रही है. ये कार्य लॉक डाउन के समय पूरा करने का सबसे उचित समय रहा है. ऐसे समय में जब लोगों को काफी परेशानियों के बाद रिजर्वेशन मिलें हैं, ट्रेनों को रेलवे की ओर से निरस्‍त करना कतई सही नहीं है. इससे लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे का ये निर्णय ठीक नहीं है. उचित समय पर इस व्‍यस्‍त रूट पर इंटरलॉकिंग का कार्य किया जाना चाहिए था.