विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार: पार्किंग निर्माण और एसी खरीद में फर्जीवाड़ा, शिकायत पर एसटीएफ ने शुरू की जांच

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत विश्वविद्यालय में पार्किंग निर्माण और एसी खरीद में एक करोड़ रुपये खर्च किए गए। पार्किंग स्थल पर आठ से 10 कार ही खड़ी हो सकती हैं। एसी भी सभी विभागों में नहीं लगे हैं।

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में घोटालों की लंबी फेहरिस्त है। यहां पार्किंग निर्माण और एसी खरीद में भी खेल कर दिया। मनमाने बिल लगाकर एक करोड़ रुपये के बजट को ठिकाने लगा दिया। इसकी शिकायत पर एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से खंदारी परिसर में पार्किंग और सौंदर्यीकरण के लिए 60 लाख रुपये का बजट मिला। इसका निर्माण 29 जुलाई 2021 में शुरू हुआ। पांच दिन में 70 फीसदी कार्य दर्शाते हुए 42 लाख रुपये का भुगतान भी हो गया। अगले कुछ दिन बाद बाकी का 30 फीसदी कार्य और पूरा कर 18 लाख रुपये भी मिल गए। ये पार्किंग में आठ से 10 कार खड़ा करने की ही क्षमता है।

इन विभागों में भी लगाए गए एसी 

ऐसे ही इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस, इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, गणित और रसायन विज्ञान विभाग और सेमिनार में एसी लगाए। इनके लिए 40 लाख रुपये का बजट खर्च दिखाया। सभी में एसी नहीं लग पाए और मनमाने बिल भी लगा दिए। छात्र संगठनों ने इन दोनों मामलों पर प्रदर्शन भी किए, लेकिन कोई जांच नहीं हुई। अब एसटीएफ को एसी खरीद और निर्माण के नाम पर घोटाले की शिकायत मिलने के बाद इसके रिकार्ड और बिल जुटाए हैं। इनकी फोटोग्राफी भी की गई है।

किस मद में कितना खर्च, कोई हिसाब नहीं

रूसा के बजट को ठिकाने के लिए मनमानी की। इसकी बैलेंस शीट में बजट किस मद में कितना खर्च हुआ। किस-किस विभाग में कितने एसी की खरीद हुई, कितने लगाए। इसका भी कोई विवरण दर्ज नहीं है। बैलेंस शीट में अधिकांश निर्माण कार्य का शुरू करने और भुगतान की भी समान तिथि दर्ज है।

पुराने मामले, एसटीएफ को दे रहे रिकॉर्ड

कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि ये निर्माण कार्य उनके कार्यकाल से पहले के हैं। इनमें क्या गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच भी एसटीएफ के दायरे में है। इनको जांच से संबंधित जो भी रिकार्ड मांगे जा रहे हैं, संबंधित विभाग और प्रभारी को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित भी किया है।